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नई फैसिलिटी से वेस्ट कम होगा
बायोमेडिकल वेस्ट प्लांट्स एडवांस्ड टेक्नोलॉजी राजधानी में स्वच्छता बढ़ेगी
दिल्ली में नए बायोमेडिकल वेस्ट प्लांट्स से प्रदूषण घटाने की तैयारी शुरू
19 Feb 2026, 02:36 PM
Uttar Pradesh
-
Ghaziabad
Reporter :
Mahesh Sharma
Ghaziabad
गाज़ियाबाद: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में हर रोज़ करीब 40 टन बायोमेडिकल वेस्ट उत्पन्न होता है, और आने वाले वर्षों में यह आंकड़ा बढ़ने की उम्मीद है। दिल्ली सरकार ने इस चुनौती से निपटने के लिए नए बायोमेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट्स लगाने की योजना बनाई है।
पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने बुधवार को कहा कि सरकार शहर की बायोमेडिकल वेस्ट प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ाने और ज़िला-स्तर पर कवरेज सुनिश्चित करने के लिए काम कर रही है। मौजूदा समय में दिल्ली में केवल दो फैसिलिटी पूरे शहर की सेवा देती हैं, लेकिन प्रस्तावित नए प्लांट्स से हर ज़िले में तीन-तीन जिलों का कवरेज संभव होगा।
सिरसा ने बताया कि नई फैसिलिटी के लिए साइट लगभग 0.5 एकड़ में प्रस्तावित की गई हैं और इनमें एडवांस्ड टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल होगा। यह तकनीक सुनिश्चित करेगी कि बायोमेडिकल वेस्ट को सुरक्षित तरीके से प्रोसेस किया जाए और पर्यावरण पर कम से कम असर पड़े।
मीटिंग के दौरान अधिकारियों ने राजधानी के लिए बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट फ्रेमवर्क पेश किया। इस फ्रेमवर्क में मौजूदा और अनुमानित वेस्ट जेनरेशन, प्रस्तावित प्लांट्स का कवरेज और पर्यावरण सुरक्षा उपाय शामिल हैं।
मनजिंदर सिरसा ने मीटिंग के बाद कहा, “हम टेक्नोलॉजी के उच्चतम स्टैंडर्ड से लैस नए ऑपरेटर्स को आमंत्रित कर रहे हैं। टेंडर जल्द ही जारी किया जाएगा। इससे न केवल प्रदूषण में कमी आएगी, बल्कि स्वास्थ्य और स्वच्छता के मानक भी बेहतर होंगे।”
विशेषज्ञों का कहना है कि बायोमेडिकल वेस्ट का उचित प्रबंधन केवल प्रदूषण कम करने के लिए नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और शहर की स्वच्छता बनाए रखने के लिए भी अहम है। राजधानी में बढ़ती जनसंख्या और अस्पतालों की संख्या के कारण यह कदम समय की मांग बन गया है।
नई फैसिलिटी के आने से कचरे का प्रोसेसिंग समय कम होगा और रिसाइक्लिंग व सुरक्षित निपटान के तरीके अपनाए जाएंगे। इससे आसपास के पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव कम होगा और हवा, पानी और मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार होगा।
सरकार की योजना के तहत दिल्ली के सभी ज़िलों में एडवांस्ड टेक्नोलॉजी से लैस प्लांट्स स्थापित किए जाएंगे। इस पहल से राजधानी में प्रदूषण कम करने, स्वास्थ्य मानकों को बनाए रखने और नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार लाने की उम्मीद है।
पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने बुधवार को कहा कि सरकार शहर की बायोमेडिकल वेस्ट प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ाने और ज़िला-स्तर पर कवरेज सुनिश्चित करने के लिए काम कर रही है। मौजूदा समय में दिल्ली में केवल दो फैसिलिटी पूरे शहर की सेवा देती हैं, लेकिन प्रस्तावित नए प्लांट्स से हर ज़िले में तीन-तीन जिलों का कवरेज संभव होगा।
सिरसा ने बताया कि नई फैसिलिटी के लिए साइट लगभग 0.5 एकड़ में प्रस्तावित की गई हैं और इनमें एडवांस्ड टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल होगा। यह तकनीक सुनिश्चित करेगी कि बायोमेडिकल वेस्ट को सुरक्षित तरीके से प्रोसेस किया जाए और पर्यावरण पर कम से कम असर पड़े।
मीटिंग के दौरान अधिकारियों ने राजधानी के लिए बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट फ्रेमवर्क पेश किया। इस फ्रेमवर्क में मौजूदा और अनुमानित वेस्ट जेनरेशन, प्रस्तावित प्लांट्स का कवरेज और पर्यावरण सुरक्षा उपाय शामिल हैं।
मनजिंदर सिरसा ने मीटिंग के बाद कहा, “हम टेक्नोलॉजी के उच्चतम स्टैंडर्ड से लैस नए ऑपरेटर्स को आमंत्रित कर रहे हैं। टेंडर जल्द ही जारी किया जाएगा। इससे न केवल प्रदूषण में कमी आएगी, बल्कि स्वास्थ्य और स्वच्छता के मानक भी बेहतर होंगे।”
विशेषज्ञों का कहना है कि बायोमेडिकल वेस्ट का उचित प्रबंधन केवल प्रदूषण कम करने के लिए नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और शहर की स्वच्छता बनाए रखने के लिए भी अहम है। राजधानी में बढ़ती जनसंख्या और अस्पतालों की संख्या के कारण यह कदम समय की मांग बन गया है।
नई फैसिलिटी के आने से कचरे का प्रोसेसिंग समय कम होगा और रिसाइक्लिंग व सुरक्षित निपटान के तरीके अपनाए जाएंगे। इससे आसपास के पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव कम होगा और हवा, पानी और मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार होगा।
सरकार की योजना के तहत दिल्ली के सभी ज़िलों में एडवांस्ड टेक्नोलॉजी से लैस प्लांट्स स्थापित किए जाएंगे। इस पहल से राजधानी में प्रदूषण कम करने, स्वास्थ्य मानकों को बनाए रखने और नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार लाने की उम्मीद है।
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