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माता-पिता देखभाल पर सख्ती
लापरवाही करने वाले कर्मचारियों की सैलरी से होगी कटौती तय
बुजुर्ग माता-पिता की अनदेखी पर सरकारी कर्मचारियों की सैलरी में कटौती करेगा तेलंगाना प्रशासन जल्द
27 Feb 2026, 12:18 PM
Telangana
-
Hyderabad
Reporter :
Mahesh Sharma
Hyderabad
तेलंगाना सरकार बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल सुनिश्चित करने के लिए एक नया नियम लागू करने की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार यदि कोई सरकारी कर्मचारी अपने वृद्ध माता-पिता की उचित देखभाल नहीं करता पाया गया, तो उसकी सैलरी से लगभग 15 प्रतिशत तक की कटौती की जा सकती है। सरकार का मानना है कि इस कदम से पारिवारिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और बुजुर्गों को बेहतर सहारा मिलेगा।
राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन अवसर पर मुख्यमंत्री ने इस प्रस्तावित नीति का संकेत दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवनशैली में कई लोग अपने माता-पिता की जिम्मेदारी से दूर हो जाते हैं, जिससे बुजुर्गों को आर्थिक और सामाजिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। सरकार चाहती है कि सरकारी कर्मचारी समाज के लिए उदाहरण बनें और अपने परिवार के वरिष्ठ सदस्यों का सम्मानपूर्वक पालन-पोषण करें।
प्रस्ताव के अनुसार, यदि किसी कर्मचारी के माता-पिता या अभिभावक प्रशासन के सामने शिकायत दर्ज कराते हैं कि उनकी देखभाल नहीं की जा रही है, तो संबंधित मामले की जांच कराई जाएगी। जांच में आरोप सही पाए जाने पर कर्मचारी के वेतन से निश्चित राशि काटकर माता-पिता को दी जा सकती है। अधिकारियों का कहना है कि इस योजना का उद्देश्य दंड देना नहीं बल्कि पारिवारिक जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित करना है।
सरकार का यह भी कहना है कि इस नियम से बुजुर्गों की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित होगी। कई मामलों में देखा गया है कि वृद्ध माता-पिता को उनके ही बच्चे आर्थिक सहायता नहीं देते, जिससे उन्हें जीवन यापन में कठिनाई होती है। प्रस्तावित नियम ऐसे मामलों में राहत देने का माध्यम बन सकता है।
इसी कार्यक्रम के दौरान सरकार ने प्रशासनिक अधिकारियों के प्रशिक्षण को बेहतर बनाने की दिशा में भी कदम उठाने की घोषणा की। बताया गया कि राज्य के प्रशिक्षण संस्थान में अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा व्यवस्था विकसित करने की योजना है। इसके तहत विदेशी शिक्षण संस्थानों के सहयोग से अधिकारियों को आधुनिक प्रशासनिक कौशल सिखाया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह नियम लागू होता है तो यह देश में अपनी तरह की एक अनोखी पहल होगी। इससे सामाजिक मूल्यों को मजबूती मिल सकती है और बुजुर्गों की स्थिति में सुधार आने की उम्मीद है। हालांकि इस प्रस्ताव को लेकर कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं पर विचार किया जा रहा है और अंतिम रूप दिए जाने के बाद ही इसे लागू किया जाएगा।
राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन अवसर पर मुख्यमंत्री ने इस प्रस्तावित नीति का संकेत दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवनशैली में कई लोग अपने माता-पिता की जिम्मेदारी से दूर हो जाते हैं, जिससे बुजुर्गों को आर्थिक और सामाजिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। सरकार चाहती है कि सरकारी कर्मचारी समाज के लिए उदाहरण बनें और अपने परिवार के वरिष्ठ सदस्यों का सम्मानपूर्वक पालन-पोषण करें।
प्रस्ताव के अनुसार, यदि किसी कर्मचारी के माता-पिता या अभिभावक प्रशासन के सामने शिकायत दर्ज कराते हैं कि उनकी देखभाल नहीं की जा रही है, तो संबंधित मामले की जांच कराई जाएगी। जांच में आरोप सही पाए जाने पर कर्मचारी के वेतन से निश्चित राशि काटकर माता-पिता को दी जा सकती है। अधिकारियों का कहना है कि इस योजना का उद्देश्य दंड देना नहीं बल्कि पारिवारिक जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित करना है।
सरकार का यह भी कहना है कि इस नियम से बुजुर्गों की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित होगी। कई मामलों में देखा गया है कि वृद्ध माता-पिता को उनके ही बच्चे आर्थिक सहायता नहीं देते, जिससे उन्हें जीवन यापन में कठिनाई होती है। प्रस्तावित नियम ऐसे मामलों में राहत देने का माध्यम बन सकता है।
इसी कार्यक्रम के दौरान सरकार ने प्रशासनिक अधिकारियों के प्रशिक्षण को बेहतर बनाने की दिशा में भी कदम उठाने की घोषणा की। बताया गया कि राज्य के प्रशिक्षण संस्थान में अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा व्यवस्था विकसित करने की योजना है। इसके तहत विदेशी शिक्षण संस्थानों के सहयोग से अधिकारियों को आधुनिक प्रशासनिक कौशल सिखाया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह नियम लागू होता है तो यह देश में अपनी तरह की एक अनोखी पहल होगी। इससे सामाजिक मूल्यों को मजबूती मिल सकती है और बुजुर्गों की स्थिति में सुधार आने की उम्मीद है। हालांकि इस प्रस्ताव को लेकर कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं पर विचार किया जा रहा है और अंतिम रूप दिए जाने के बाद ही इसे लागू किया जाएगा।
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