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धारावी गलियों में करोड़ों व्यापार
टिन झोपड़ियों में चलते अरबों रुपये का व्यावसायिक कारोबार
धारावी के गलियों में अरबों का कारोबार, छोटे कारखाने और स्ट्रीट फूड की शक्ति अद्वितीय
23 Feb 2026, 03:04 PM
Maharashtra
-
Mumbai
Reporter :
Mahesh Sharma
Mumbai
मुंबई की ऊंची-ऊंची इमारतों के बीच बसी धारावी को अक्सर सिर्फ झुग्गियों और गरीबी के लिए जाना जाता है। लेकिन इस छोटे से इलाके की गलियों में चलने वाला व्यापार अरबों रुपये का है, जो हर किसी के लिए आश्चर्यजनक है। धारावी को अक्सर 'शहर के भीतर बसा शहर' कहा जाता है, क्योंकि यहां की संकरी गलियों में ही हजारों छोटे कारखाने और व्यवसायिक प्रतिष्ठान संचालित होते हैं।
धारावी में लगभग 5,000 छोटे-छोटे कारखाने हैं। यहां कारीगर बैग, जैकेट, बटुए, घोड़ों की काठी, चाबुक और कई अन्य हस्तशिल्प बनाते हैं। हर हाथ में कौशल और जादू है, जो लाखों लोगों के लिए रोज़गार और शहर की अर्थव्यवस्था में योगदान देता है।
धारावी की असली ताकत इसकी हुनरमंद जनसंख्या और व्यवसायिक नेटवर्क में छिपी है। जहां झुग्गियों में रहने वाले परिवार का किराया 3 से 7 हजार रुपये मासिक है, वहीं इन गलियों की सड़क किनारे की व्यावसायिक दुकानों का किराया डेढ़ लाख रुपये से शुरू होता है। यह दिखाता है कि धारावी केवल गरीबी की कहानी नहीं, बल्कि आर्थिक अवसरों का भी केंद्र है।
सड़क किनारे के स्ट्रीट फूड की खुशबू और स्थानीय कारोबार की गति इस जगह की पहचान बन चुकी है। धारावी का स्ट्रीट फूड पूरे मुंबई में प्रसिद्ध है और यह स्थानीय पर्यटन और व्यापार के लिए भी महत्वपूर्ण है।
धारावी में कबाड़ी वाले भी अहम भूमिका निभाते हैं। ये लोग पुरानी गाड़ियों, रद्दी कागज और अन्य सामान को इकट्ठा कर शहर की री-साइक्लिंग अर्थव्यवस्था में योगदान करते हैं। उनके काम से न केवल कचरे का पुनर्चक्रण होता है, बल्कि लाखों की आय भी इस इलाके में उत्पन्न होती है।
विशेषज्ञ कहते हैं कि धारावी की गलियों की आर्थिक क्षमता अक्सर बाहरी लोगों की समझ से परे रहती है। यहाँ की झोपड़ियां और गलियां बदल सकती हैं, लेकिन इस इलाके की व्यावसायिक ऊर्जा और सामाजिक संरचना हमेशा बनी रहती है।
धारावी का यह मॉडल छोटे व्यापार और हस्तशिल्प के लिए प्रेरणा स्रोत बन सकता है। यह साबित करता है कि गरीबी और तंग गलियां आर्थिक अवसरों और हुनर का केंद्र भी बन सकती हैं। मुंबई जैसे महानगर में यह गलियों वाला कारोबार एक अद्वितीय मिसाल है, जहां हजारों कारीगर और व्यापारी मिलकर अरबों रुपये का कारोबार चला रहे हैं।
संक्षेप में, धारावी सिर्फ झुग्गियों का नाम नहीं, बल्कि मुंबई की अदृश्य आर्थिक शक्ति का प्रतीक है। यहाँ का हुनर, छोटे कारखाने और स्ट्रीट फूड पूरे शहर और देश में अपनी अलग पहचान बनाते हैं।
धारावी में लगभग 5,000 छोटे-छोटे कारखाने हैं। यहां कारीगर बैग, जैकेट, बटुए, घोड़ों की काठी, चाबुक और कई अन्य हस्तशिल्प बनाते हैं। हर हाथ में कौशल और जादू है, जो लाखों लोगों के लिए रोज़गार और शहर की अर्थव्यवस्था में योगदान देता है।
धारावी की असली ताकत इसकी हुनरमंद जनसंख्या और व्यवसायिक नेटवर्क में छिपी है। जहां झुग्गियों में रहने वाले परिवार का किराया 3 से 7 हजार रुपये मासिक है, वहीं इन गलियों की सड़क किनारे की व्यावसायिक दुकानों का किराया डेढ़ लाख रुपये से शुरू होता है। यह दिखाता है कि धारावी केवल गरीबी की कहानी नहीं, बल्कि आर्थिक अवसरों का भी केंद्र है।
सड़क किनारे के स्ट्रीट फूड की खुशबू और स्थानीय कारोबार की गति इस जगह की पहचान बन चुकी है। धारावी का स्ट्रीट फूड पूरे मुंबई में प्रसिद्ध है और यह स्थानीय पर्यटन और व्यापार के लिए भी महत्वपूर्ण है।
धारावी में कबाड़ी वाले भी अहम भूमिका निभाते हैं। ये लोग पुरानी गाड़ियों, रद्दी कागज और अन्य सामान को इकट्ठा कर शहर की री-साइक्लिंग अर्थव्यवस्था में योगदान करते हैं। उनके काम से न केवल कचरे का पुनर्चक्रण होता है, बल्कि लाखों की आय भी इस इलाके में उत्पन्न होती है।
विशेषज्ञ कहते हैं कि धारावी की गलियों की आर्थिक क्षमता अक्सर बाहरी लोगों की समझ से परे रहती है। यहाँ की झोपड़ियां और गलियां बदल सकती हैं, लेकिन इस इलाके की व्यावसायिक ऊर्जा और सामाजिक संरचना हमेशा बनी रहती है।
धारावी का यह मॉडल छोटे व्यापार और हस्तशिल्प के लिए प्रेरणा स्रोत बन सकता है। यह साबित करता है कि गरीबी और तंग गलियां आर्थिक अवसरों और हुनर का केंद्र भी बन सकती हैं। मुंबई जैसे महानगर में यह गलियों वाला कारोबार एक अद्वितीय मिसाल है, जहां हजारों कारीगर और व्यापारी मिलकर अरबों रुपये का कारोबार चला रहे हैं।
संक्षेप में, धारावी सिर्फ झुग्गियों का नाम नहीं, बल्कि मुंबई की अदृश्य आर्थिक शक्ति का प्रतीक है। यहाँ का हुनर, छोटे कारखाने और स्ट्रीट फूड पूरे शहर और देश में अपनी अलग पहचान बनाते हैं।
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