Search News
Tip: Search by heading, content, category, city, state, highlights.
- Select Location
- ताज़ा खबर
- राष्ट्रीय (भारत)
- अंतरराष्ट्रीय
- राज्य व क्षेत्रीय
- राजनीति
- सरकार व प्रशासन
- नीति व नियम
- न्यायालय व न्यायपालिका
- कानून व्यवस्था
- अपराध
- साइबर अपराध व डिजिटल सुरक्षा
- रक्षा
- सुरक्षा व आतंकवाद
- अर्थव्यवस्था (मैक्रो)
- व्यापार व कॉरपोरेट
- बैंकिंग व भुगतान
- स्टार्टअप व उद्यमिता
- टेक्नोलॉजी
- विज्ञान व अनुसंधान
- पर्यावरण
- मौसम
- आपदा व आपातकाल
- स्वास्थ्य
- फिटनेस व वेलनेस
- शिक्षा
- नौकरी व करियर
- कृषि
- ग्रामीण विकास
- परिवहन
- दुर्घटना व सुरक्षा
- ऑटोमोबाइल व ईवी
- खेल
- मनोरंजन
- धर्म व अध्यात्म
- समाज व सामाजिक मुद्दे
- लाइफस्टाइल
- यात्रा व पर्यटन
- जन सेवा व अलर्ट
- जांच व विशेष रिपोर्ट
- प्रतियोगी परीक्षाएँ
- खेल (अन्य)
Choose Location
Current:
India
Country: India
Selected State: None
मैक्रों की भारत को सलाह
मैक्रों ने बच्चों पर सोशल मीडिया प्रतिबंध की वकालत की
मैक्रों की सलाह पर बहस तेज क्या भारत में 15 साल से कम बच्चों पर सोशल मीडिया बैन संभव
20 Feb 2026, 10:55 AM
Delhi
-
New Delhi
Reporter :
Mahesh Sharma
New Delhi
फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron ने हाल ही में एआई इंपैक्ट समिट 2026 के दौरान भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi को सुझाव दिया कि 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध पर विचार किया जाना चाहिए। इस बयान के बाद भारत में डिजिटल नीति, बच्चों की सुरक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर नई बहस छिड़ गई है।
मैक्रों का तर्क है कि कम उम्र के बच्चों का मस्तिष्क अभी विकास की अवस्था में होता है और सोशल मीडिया के एल्गोरिदम उन्हें लंबे समय तक स्क्रीन से जोड़े रखते हैं। इससे मानसिक स्वास्थ्य, एकाग्रता और सामाजिक व्यवहार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। कई देशों में बच्चों के लिए सोशल मीडिया उपयोग की न्यूनतम आयु बढ़ाने या सख्त निगरानी की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।
भारत में भी अभिभावकों के बीच यह चिंता लंबे समय से मौजूद है कि बच्चों में मोबाइल और सोशल मीडिया की लत बढ़ती जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक स्क्रीन टाइम से नींद, पढ़ाई और पारिवारिक संवाद प्रभावित हो रहे हैं। हालांकि, संगठित रूप से अब तक देशव्यापी प्रतिबंध की मांग नहीं उठी है।
यदि भारत में 15 वर्ष से कम आयु के बच्चों पर सोशल मीडिया प्रतिबंध लागू किया जाता है, तो कई व्यवहारिक और कानूनी चुनौतियां सामने आ सकती हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आयु सत्यापन कैसे किया जाएगा? वर्तमान में अधिकांश प्लेटफॉर्म केवल उपयोगकर्ता द्वारा दर्ज की गई जानकारी पर निर्भर करते हैं। तकनीकी स्तर पर सख्त आयु जांच प्रणाली लागू करना जटिल और महंगा हो सकता है।
दूसरा महत्वपूर्ण पहलू भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 से जुड़ा है, जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की गारंटी देता है। यदि व्यापक प्रतिबंध लगाया जाता है, तो यह कानूनी बहस का विषय बन सकता है। नीति विशेषज्ञों का मानना है कि पूर्ण प्रतिबंध के बजाय डिजिटल साक्षरता, पैरेंटल कंट्रोल और समय-सीमा जैसे विकल्प अधिक व्यवहारिक हो सकते हैं।
सरकार की ओर से अभी तक इस विषय पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन डिजिटल सुरक्षा और डेटा संरक्षण को लेकर चर्चा तेज है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भारत फ्रांस के सुझाव को किस रूप में अपनाता है—पूर्ण प्रतिबंध, आंशिक नियंत्रण या जागरूकता अभियान के रूप में।
फिलहाल, यह मुद्दा बच्चों की सुरक्षा और डिजिटल स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाने की चुनौती के रूप में सामने आया है।
मैक्रों का तर्क है कि कम उम्र के बच्चों का मस्तिष्क अभी विकास की अवस्था में होता है और सोशल मीडिया के एल्गोरिदम उन्हें लंबे समय तक स्क्रीन से जोड़े रखते हैं। इससे मानसिक स्वास्थ्य, एकाग्रता और सामाजिक व्यवहार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। कई देशों में बच्चों के लिए सोशल मीडिया उपयोग की न्यूनतम आयु बढ़ाने या सख्त निगरानी की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।
भारत में भी अभिभावकों के बीच यह चिंता लंबे समय से मौजूद है कि बच्चों में मोबाइल और सोशल मीडिया की लत बढ़ती जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक स्क्रीन टाइम से नींद, पढ़ाई और पारिवारिक संवाद प्रभावित हो रहे हैं। हालांकि, संगठित रूप से अब तक देशव्यापी प्रतिबंध की मांग नहीं उठी है।
यदि भारत में 15 वर्ष से कम आयु के बच्चों पर सोशल मीडिया प्रतिबंध लागू किया जाता है, तो कई व्यवहारिक और कानूनी चुनौतियां सामने आ सकती हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आयु सत्यापन कैसे किया जाएगा? वर्तमान में अधिकांश प्लेटफॉर्म केवल उपयोगकर्ता द्वारा दर्ज की गई जानकारी पर निर्भर करते हैं। तकनीकी स्तर पर सख्त आयु जांच प्रणाली लागू करना जटिल और महंगा हो सकता है।
दूसरा महत्वपूर्ण पहलू भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 से जुड़ा है, जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की गारंटी देता है। यदि व्यापक प्रतिबंध लगाया जाता है, तो यह कानूनी बहस का विषय बन सकता है। नीति विशेषज्ञों का मानना है कि पूर्ण प्रतिबंध के बजाय डिजिटल साक्षरता, पैरेंटल कंट्रोल और समय-सीमा जैसे विकल्प अधिक व्यवहारिक हो सकते हैं।
सरकार की ओर से अभी तक इस विषय पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन डिजिटल सुरक्षा और डेटा संरक्षण को लेकर चर्चा तेज है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भारत फ्रांस के सुझाव को किस रूप में अपनाता है—पूर्ण प्रतिबंध, आंशिक नियंत्रण या जागरूकता अभियान के रूप में।
फिलहाल, यह मुद्दा बच्चों की सुरक्षा और डिजिटल स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाने की चुनौती के रूप में सामने आया है।
ADVERTISEMENT
Sponsored
More News
एआई अपडेट से स्टार्टअप बंद होने का दावा, फाउंडर ने बताया कैसे खत्म हुआ कारोबार अचानक
February 27, 2026
संजू सैमसन की बल्लेबाजी पर उठे सवाल, गावस्कर ने लगातार एक जैसी गलती बताई वजह
February 27, 2026
संभल में रंग एकादशी जुलूस और जुम्मे नमाज को लेकर प्रशासन ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की
February 27, 2026
लखनऊ में खाद्य विभाग की बड़ी छापेमारी, नकली मसाले और खोया जब्त कर कार्रवाई
February 27, 2026
अफगान संघर्ष के बीच पाकिस्तानी लड़ाकू विमान गिराने के दावों पर सोशल मीडिया में चर्चा तेज
February 27, 2026
अफगानिस्तान को कड़ी चेतावनी पाक रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने संघर्ष तेज होने संकेत दिए
February 27, 2026
पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर हिंसक संघर्ष तेज, हवाई हमलों और जवाबी कार्रवाई से हालात गंभीर बने
February 27, 2026
अग्रिम जमानत पर फैसला अहम, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई आज
February 27, 2026
दिल्ली में आयुष्मान योजना का विस्तार, दिव्यांग और जरूरतमंद परिवारों को मिलेगा मुफ्त इलाज लाभ
February 27, 2026
पूर्व मुख्यमंत्री पन्नीरसेल्वम ने डीएमके का दामन थामा, चुनाव से पहले सियासत गरमाई तमिलनाडु में
February 27, 2026
ADVERTISEMENT
Sponsored
Open
Loading more…