Search News
Tip: Search by heading, content, category, city, state, highlights.
- Select Location
- ताज़ा खबर
- राष्ट्रीय (भारत)
- अंतरराष्ट्रीय
- राज्य व क्षेत्रीय
- राजनीति
- सरकार व प्रशासन
- नीति व नियम
- न्यायालय व न्यायपालिका
- कानून व्यवस्था
- अपराध
- साइबर अपराध व डिजिटल सुरक्षा
- रक्षा
- सुरक्षा व आतंकवाद
- अर्थव्यवस्था (मैक्रो)
- व्यापार व कॉरपोरेट
- बैंकिंग व भुगतान
- स्टार्टअप व उद्यमिता
- टेक्नोलॉजी
- विज्ञान व अनुसंधान
- पर्यावरण
- मौसम
- आपदा व आपातकाल
- स्वास्थ्य
- फिटनेस व वेलनेस
- शिक्षा
- नौकरी व करियर
- कृषि
- ग्रामीण विकास
- परिवहन
- दुर्घटना व सुरक्षा
- ऑटोमोबाइल व ईवी
- खेल
- मनोरंजन
- धर्म व अध्यात्म
- समाज व सामाजिक मुद्दे
- लाइफस्टाइल
- यात्रा व पर्यटन
- जन सेवा व अलर्ट
- जांच व विशेष रिपोर्ट
- प्रतियोगी परीक्षाएँ
- खेल (अन्य)
Choose Location
Current:
India
Country: India
Selected State: None
रिवालसर में गूंजती साधना
बौद्ध मंत्रोच्चार से रिवालसर झील बनी आध्यात्मिक चेतना का केंद्र
मोक्ष की तलाश में रिवालसर झील पर जुटे श्रद्धालु, दिन-रात चल रही बौद्ध साधना
06 Feb 2026, 09:28 AM
4020
-
Manali
Reporter :
Mahesh Sharma
Manali
हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में स्थित पवित्र रिवालसर झील इन दिनों केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि गहन आध्यात्मिक चेतना और साधना का केंद्र बन चुकी है। पहाड़ियों के बीच बसी यह ऐतिहासिक झील मंत्रोच्चार, प्रार्थनाओं और बौद्ध अनुष्ठानों की गूंज से दिन-रात जीवंत है। यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु मोक्ष, मानसिक शांति और आत्मिक ऊर्जा की खोज में विशेष साधनाओं में भाग ले रहे हैं।
हर वर्ष सर्दियों के आगमन के साथ देश के विभिन्न हिस्सों—किन्नौर, लाहौल-स्पीति, लेह-लद्दाख, अरुणाचल प्रदेश और उत्तर-पूर्वी राज्यों से बड़ी संख्या में बौद्ध अनुयायी रिवालसर पहुंचते हैं। इस बार भी श्रद्धालुओं का भारी जमावड़ा देखने को मिल रहा है। झील के किनारे बने मठों और खुले प्रांगणों में विशेष बौद्ध साधना, ध्यान सत्र और मंत्र जाप का आयोजन किया जा रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, रिवालसर का सबसे पवित्र समय सुबह का होता है। सूर्योदय के साथ ही जब पहली किरण झील के जल पर पड़ती है, उसी समय लामा समुदाय द्वारा किए जा रहे मंत्र जाप से पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठता है। यह दृश्य श्रद्धालुओं के लिए अविस्मरणीय अनुभव बन जाता है।
लेह-लद्दाख के झांस्कर क्षेत्र से आए बौद्ध अनुयायी नोडबू टशी बताते हैं कि रिवालसर उनके लिए केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आत्मा को शुद्ध करने का माध्यम है। उनका कहना है कि यहां ध्यान करने से मन को गहरी शांति मिलती है और जीवन के तनाव स्वतः कम हो जाते हैं।
किन्नौर से आईं 75 वर्षीय ओपाल जंगमो की कहानी भी श्रद्धा से भर देने वाली है। वे बताती हैं कि पहली बार वे 19 वर्ष की उम्र में रिवालसर आई थीं और तब से हर कुछ वर्षों में यहां आना उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा बन गया है। उनके अनुसार, यह स्थान उन्हें भीतर से मजबूत और शांत बनाए रखता है।
बौद्ध धर्म में रिवालसर का विशेष महत्व है। मान्यता है कि गुरु पद्मसंभव (गुरु रिनपोछे) ने यहीं वर्षों तक तपस्या की थी। झील के समीप उनकी प्रतिमा और मठ आज भी श्रद्धालुओं के आस्था का केंद्र हैं।
रिवालसर की विशेषता यह भी है कि यह केवल बौद्ध धर्म तक सीमित नहीं है। इसे हिंदू, सिख और बौद्ध—तीनों धर्मों की संगम स्थली माना जाता है। हिंदुओं के लिए ऋषि लोमश, सिखों के लिए गुरु गोबिंद सिंह और बौद्धों के लिए गुरु पद्मसंभव से जुड़ी मान्यताएं इस स्थान को अद्वितीय बनाती हैं।
हर वर्ष सर्दियों के आगमन के साथ देश के विभिन्न हिस्सों—किन्नौर, लाहौल-स्पीति, लेह-लद्दाख, अरुणाचल प्रदेश और उत्तर-पूर्वी राज्यों से बड़ी संख्या में बौद्ध अनुयायी रिवालसर पहुंचते हैं। इस बार भी श्रद्धालुओं का भारी जमावड़ा देखने को मिल रहा है। झील के किनारे बने मठों और खुले प्रांगणों में विशेष बौद्ध साधना, ध्यान सत्र और मंत्र जाप का आयोजन किया जा रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, रिवालसर का सबसे पवित्र समय सुबह का होता है। सूर्योदय के साथ ही जब पहली किरण झील के जल पर पड़ती है, उसी समय लामा समुदाय द्वारा किए जा रहे मंत्र जाप से पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठता है। यह दृश्य श्रद्धालुओं के लिए अविस्मरणीय अनुभव बन जाता है।
लेह-लद्दाख के झांस्कर क्षेत्र से आए बौद्ध अनुयायी नोडबू टशी बताते हैं कि रिवालसर उनके लिए केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आत्मा को शुद्ध करने का माध्यम है। उनका कहना है कि यहां ध्यान करने से मन को गहरी शांति मिलती है और जीवन के तनाव स्वतः कम हो जाते हैं।
किन्नौर से आईं 75 वर्षीय ओपाल जंगमो की कहानी भी श्रद्धा से भर देने वाली है। वे बताती हैं कि पहली बार वे 19 वर्ष की उम्र में रिवालसर आई थीं और तब से हर कुछ वर्षों में यहां आना उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा बन गया है। उनके अनुसार, यह स्थान उन्हें भीतर से मजबूत और शांत बनाए रखता है।
बौद्ध धर्म में रिवालसर का विशेष महत्व है। मान्यता है कि गुरु पद्मसंभव (गुरु रिनपोछे) ने यहीं वर्षों तक तपस्या की थी। झील के समीप उनकी प्रतिमा और मठ आज भी श्रद्धालुओं के आस्था का केंद्र हैं।
रिवालसर की विशेषता यह भी है कि यह केवल बौद्ध धर्म तक सीमित नहीं है। इसे हिंदू, सिख और बौद्ध—तीनों धर्मों की संगम स्थली माना जाता है। हिंदुओं के लिए ऋषि लोमश, सिखों के लिए गुरु गोबिंद सिंह और बौद्धों के लिए गुरु पद्मसंभव से जुड़ी मान्यताएं इस स्थान को अद्वितीय बनाती हैं।
ADVERTISEMENT
Sponsored
Ad
Open
More News
अफगानिस्तान को कड़ी चेतावनी पाक रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने संघर्ष तेज होने संकेत दिए
February 27, 2026
अफगान संघर्ष के बीच पाकिस्तानी लड़ाकू विमान गिराने के दावों पर सोशल मीडिया में चर्चा तेज
February 27, 2026
लखनऊ में खाद्य विभाग की बड़ी छापेमारी, नकली मसाले और खोया जब्त कर कार्रवाई
February 27, 2026
संभल में रंग एकादशी जुलूस और जुम्मे नमाज को लेकर प्रशासन ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की
February 27, 2026
संजू सैमसन की बल्लेबाजी पर उठे सवाल, गावस्कर ने लगातार एक जैसी गलती बताई वजह
February 27, 2026
एआई अपडेट से स्टार्टअप बंद होने का दावा, फाउंडर ने बताया कैसे खत्म हुआ कारोबार अचानक
February 27, 2026
शादी के बाद पहली बार साथ दिखेंगे रश्मिका और विजय, नई फिल्म को लेकर बढ़ी उत्सुकता
February 27, 2026
बुजुर्ग माता-पिता की अनदेखी पर सरकारी कर्मचारियों की सैलरी में कटौती करेगा तेलंगाना प्रशासन जल्द
February 27, 2026
पूर्व मुख्यमंत्री पन्नीरसेल्वम ने डीएमके का दामन थामा, चुनाव से पहले सियासत गरमाई तमिलनाडु में
February 27, 2026
दिल्ली में आयुष्मान योजना का विस्तार, दिव्यांग और जरूरतमंद परिवारों को मिलेगा मुफ्त इलाज लाभ
February 27, 2026
ADVERTISEMENT
Sponsored
Open
Loading more…