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अनिल अंबानी को झटका
कोर्ट ने चार हफ्तों की मोहलत देने से इनकार किया
बॉम्बे हाईकोर्ट ने अनिल अंबानी की बैंक फ्रॉड राहत अर्जी को ठुकराया
23 Feb 2026, 03:36 PM
Maharashtra
-
Mumbai
Reporter :
Mahesh Sharma
Mumbai
उद्योगपति अनिल अंबानी को हाल ही में बॉम्बे हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। बैंक फ्रॉड मामले में उनकी ओर से पेश वकीलों ने अदालत से चार हफ्तों की मोहलत की मांग की थी, ताकि अंतरिम राहत जारी रहे और बैंक फ्रॉड प्रक्रिया के खिलाफ अपील की जा सके। हालांकि, न्यायाधीशों ने यह कहते हुए अनुरोध ठुकरा दिया कि जब आदेश अवैध और अनियमित पाया गया है, तो उसे रोका नहीं जा सकता।
यह मामला रिलायंस कम्युनिकेशंस और अनिल अंबानी के लोन खातों को लेकर है। कुछ बैंकों ने इनके लोन को 'फ्रॉड' घोषित करने की प्रक्रिया शुरू की थी। इस प्रक्रिया के तहत, बैंकों ने कहा कि कंपनी और उद्योगपति ने कुछ देयताओं का पालन नहीं किया और वित्तीय व्यवहार में अनियमितताएं पाई गईं।
24 दिसंबर 2025 को जस्टिस मिलिंद जाधव की बेंच ने पहले अंतरिम राहत दी थी, जिससे अनिल अंबानी और उनकी कंपनी को कुछ समय के लिए बैंक कार्रवाई से सुरक्षा मिल गई थी। इसके तहत कुछ ऋणों की वसूली और फ्रॉड प्रक्रिया पर फिलहाल रोक लगाई गई थी। लेकिन अब उसी आदेश को हाईकोर्ट की एक अन्य बेंच ने अवैध और अनियमित पाया।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बैंक फ्रॉड मामले में नियमों और प्रक्रियाओं का पालन होना अनिवार्य है। अदालत ने कहा कि वित्तीय संस्थानों को यह अधिकार है कि वे कानून के अनुसार अपने फंड्स की सुरक्षा करें और यदि कोई कंपनी या उद्योगपति नियमों का उल्लंघन करता है, तो उचित कार्रवाई हो सकती है।
अनिल अंबानी के वकीलों ने अदालत में यह तर्क दिया कि आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होने पर उनके क्लाइंट और कंपनी के लिए गंभीर वित्तीय नुकसान हो सकता है। हालांकि, कोर्ट ने इनकार करते हुए कहा कि वित्तीय नियमों और बैंकों के अधिकारों की रक्षा सर्वोपरि है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अनिल अंबानी और रिलायंस कम्युनिकेशंस के खिलाफ यह फैसला उनके लिए गंभीर है। यदि कोर्ट ने राहत नहीं दी, तो बैंक अपनी कार्रवाई आगे बढ़ा सकते हैं। इससे उद्योगपति की वित्तीय स्थिति पर दबाव बढ़ सकता है और कंपनी के परिचालन में चुनौतियां आ सकती हैं।
हालांकि, यह मामला अभी खत्म नहीं हुआ है। अनिल अंबानी की टीम अब उच्च न्यायालय में अपील कर सकती है और विभिन्न कानूनी उपायों के जरिए राहत पाने की कोशिश करेगी। इस बीच, बैंक फ्रॉड प्रक्रिया और वित्तीय संस्थाओं की निगरानी भारत में व्यावसायिक और कॉर्पोरेट जगत में एक अहम संदेश देती है कि नियमों का पालन करना अनिवार्य है।
यह मामला रिलायंस कम्युनिकेशंस और अनिल अंबानी के लोन खातों को लेकर है। कुछ बैंकों ने इनके लोन को 'फ्रॉड' घोषित करने की प्रक्रिया शुरू की थी। इस प्रक्रिया के तहत, बैंकों ने कहा कि कंपनी और उद्योगपति ने कुछ देयताओं का पालन नहीं किया और वित्तीय व्यवहार में अनियमितताएं पाई गईं।
24 दिसंबर 2025 को जस्टिस मिलिंद जाधव की बेंच ने पहले अंतरिम राहत दी थी, जिससे अनिल अंबानी और उनकी कंपनी को कुछ समय के लिए बैंक कार्रवाई से सुरक्षा मिल गई थी। इसके तहत कुछ ऋणों की वसूली और फ्रॉड प्रक्रिया पर फिलहाल रोक लगाई गई थी। लेकिन अब उसी आदेश को हाईकोर्ट की एक अन्य बेंच ने अवैध और अनियमित पाया।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बैंक फ्रॉड मामले में नियमों और प्रक्रियाओं का पालन होना अनिवार्य है। अदालत ने कहा कि वित्तीय संस्थानों को यह अधिकार है कि वे कानून के अनुसार अपने फंड्स की सुरक्षा करें और यदि कोई कंपनी या उद्योगपति नियमों का उल्लंघन करता है, तो उचित कार्रवाई हो सकती है।
अनिल अंबानी के वकीलों ने अदालत में यह तर्क दिया कि आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होने पर उनके क्लाइंट और कंपनी के लिए गंभीर वित्तीय नुकसान हो सकता है। हालांकि, कोर्ट ने इनकार करते हुए कहा कि वित्तीय नियमों और बैंकों के अधिकारों की रक्षा सर्वोपरि है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अनिल अंबानी और रिलायंस कम्युनिकेशंस के खिलाफ यह फैसला उनके लिए गंभीर है। यदि कोर्ट ने राहत नहीं दी, तो बैंक अपनी कार्रवाई आगे बढ़ा सकते हैं। इससे उद्योगपति की वित्तीय स्थिति पर दबाव बढ़ सकता है और कंपनी के परिचालन में चुनौतियां आ सकती हैं।
हालांकि, यह मामला अभी खत्म नहीं हुआ है। अनिल अंबानी की टीम अब उच्च न्यायालय में अपील कर सकती है और विभिन्न कानूनी उपायों के जरिए राहत पाने की कोशिश करेगी। इस बीच, बैंक फ्रॉड प्रक्रिया और वित्तीय संस्थाओं की निगरानी भारत में व्यावसायिक और कॉर्पोरेट जगत में एक अहम संदेश देती है कि नियमों का पालन करना अनिवार्य है।
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