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सिम लिंक जरूरी होगा उपयोग
WhatsApp Telegram उपयोग के लिए सिम मौजूद होना जरूरी
सिम बाइंडिंग नियम लागू होने से मैसेजिंग ऐप उपयोग पर नए प्रतिबंध लागू होंगे जल्द
27 Feb 2026, 03:22 PM
Delhi
-
New Delhi
Reporter :
Mahesh Sharma
New Delhi
देश में डिजिटल सुरक्षा को मजबूत बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार जल्द ही सिम बाइंडिंग नियम लागू करने जा रही है। इस नियम के लागू होने के बाद WhatsApp, Telegram सहित कई मैसेजिंग ऐप्स का उपयोग उसी मोबाइल सिम से जुड़ा होगा, जिससे अकाउंट रजिस्टर किया गया है। बताया जा रहा है कि यह नियम 1 मार्च से प्रभावी हो सकता है, जिसे लेकर दूरसंचार विभाग ने संबंधित कंपनियों को निर्देश जारी किए हैं।
नए नियम के अनुसार यदि किसी उपयोगकर्ता के मोबाइल फोन में वह सिम कार्ड मौजूद नहीं होगा, जिसके जरिए मैसेजिंग ऐप पर रजिस्ट्रेशन किया गया है, तो ऐप की कुछ सेवाएं बंद हो सकती हैं या पूरा अकाउंट सीमित किया जा सकता है। सरकार का मानना है कि इससे फर्जी अकाउंट, ऑनलाइन धोखाधड़ी और साइबर अपराधों पर नियंत्रण लगाने में मदद मिलेगी।
सिम बाइंडिंग नियम का सबसे ज्यादा असर उन उपयोगकर्ताओं पर पड़ने की संभावना है, जो एक ही नंबर से कई डिवाइस पर मैसेजिंग ऐप चलाते हैं या बार-बार सिम कार्ड बदलते रहते हैं। ऐसे उपयोगकर्ताओं को भविष्य में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा WhatsApp Web या दूसरे लिंक्ड डिवाइस फीचर का इस्तेमाल करने वाले यूजर्स पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार यह नियम केवल WhatsApp तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि Telegram, Signal और अन्य इंटरनेट आधारित मैसेजिंग सेवाएं भी इसके दायरे में आएंगी। सभी कंपनियों को यूजर अकाउंट को मोबाइल सिम से जोड़ने की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी।
हालांकि इस प्रस्ताव को लेकर कुछ अंतरराष्ट्रीय टेक कंपनियों और उद्योग संगठनों ने चिंता भी जताई है। उनका कहना है कि सिम बाइंडिंग नियम लागू होने से यूजर की सुविधा प्रभावित हो सकती है और डेटा गोपनीयता से जुड़े सवाल भी उठ सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की व्यवस्था लागू करने के लिए तकनीकी ढांचे और स्पष्ट दिशानिर्देशों की जरूरत होगी।
सरकार का तर्क है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पहचान सुनिश्चित करना समय की जरूरत है। बढ़ते साइबर अपराध और फर्जी प्रोफाइल के मामलों को देखते हुए सख्त नियम जरूरी हो गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि नए नियम से मोबाइल नंबर आधारित सत्यापन प्रणाली और अधिक मजबूत बनेगी।
फिलहाल इस नियम को लेकर अंतिम दिशा-निर्देश जारी होने का इंतजार किया जा रहा है। अगर यह व्यवस्था लागू होती है तो करोड़ों मोबाइल उपयोगकर्ताओं को अपने मैसेजिंग अकाउंट उसी सिम से संचालित करने होंगे, जिससे उनका पंजीकरण किया गया है। इससे देश में डिजिटल संचार व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
नए नियम के अनुसार यदि किसी उपयोगकर्ता के मोबाइल फोन में वह सिम कार्ड मौजूद नहीं होगा, जिसके जरिए मैसेजिंग ऐप पर रजिस्ट्रेशन किया गया है, तो ऐप की कुछ सेवाएं बंद हो सकती हैं या पूरा अकाउंट सीमित किया जा सकता है। सरकार का मानना है कि इससे फर्जी अकाउंट, ऑनलाइन धोखाधड़ी और साइबर अपराधों पर नियंत्रण लगाने में मदद मिलेगी।
सिम बाइंडिंग नियम का सबसे ज्यादा असर उन उपयोगकर्ताओं पर पड़ने की संभावना है, जो एक ही नंबर से कई डिवाइस पर मैसेजिंग ऐप चलाते हैं या बार-बार सिम कार्ड बदलते रहते हैं। ऐसे उपयोगकर्ताओं को भविष्य में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा WhatsApp Web या दूसरे लिंक्ड डिवाइस फीचर का इस्तेमाल करने वाले यूजर्स पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार यह नियम केवल WhatsApp तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि Telegram, Signal और अन्य इंटरनेट आधारित मैसेजिंग सेवाएं भी इसके दायरे में आएंगी। सभी कंपनियों को यूजर अकाउंट को मोबाइल सिम से जोड़ने की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी।
हालांकि इस प्रस्ताव को लेकर कुछ अंतरराष्ट्रीय टेक कंपनियों और उद्योग संगठनों ने चिंता भी जताई है। उनका कहना है कि सिम बाइंडिंग नियम लागू होने से यूजर की सुविधा प्रभावित हो सकती है और डेटा गोपनीयता से जुड़े सवाल भी उठ सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की व्यवस्था लागू करने के लिए तकनीकी ढांचे और स्पष्ट दिशानिर्देशों की जरूरत होगी।
सरकार का तर्क है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पहचान सुनिश्चित करना समय की जरूरत है। बढ़ते साइबर अपराध और फर्जी प्रोफाइल के मामलों को देखते हुए सख्त नियम जरूरी हो गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि नए नियम से मोबाइल नंबर आधारित सत्यापन प्रणाली और अधिक मजबूत बनेगी।
फिलहाल इस नियम को लेकर अंतिम दिशा-निर्देश जारी होने का इंतजार किया जा रहा है। अगर यह व्यवस्था लागू होती है तो करोड़ों मोबाइल उपयोगकर्ताओं को अपने मैसेजिंग अकाउंट उसी सिम से संचालित करने होंगे, जिससे उनका पंजीकरण किया गया है। इससे देश में डिजिटल संचार व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
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