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पांच सीटों पर चुनाव
राज्यसभा की पांच सीटों पर जल्द मतदान प्रस्तावित है
बंगाल राज्यसभा चुनाव में संख्या बल मजबूत, तृणमूल चार सीटों पर बढ़त में भाजपा को एक मौका
26 Feb 2026, 12:05 PM
West Bengal
-
Kolkata
Reporter :
Mahesh Sharma
Kolkata
पश्चिम बंगाल में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए होने वाले चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। विधानसभा के मौजूदा संख्या बल को देखते हुए सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस चार सीटों पर मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है, जबकि भारतीय जनता पार्टी को एक सीट मिलने की संभावना जताई जा रही है।
राज्यसभा चुनाव पूरी तरह विधानसभा के गणित पर आधारित होता है और इसी कारण तृणमूल कांग्रेस को स्पष्ट बढ़त मिलती दिख रही है। विधानसभा में तृणमूल के पास भारी बहुमत है, जिससे वह आसानी से अपने चार उम्मीदवारों को राज्यसभा भेज सकती है। दूसरी ओर भाजपा के पास इतना संख्या बल मौजूद है कि वह कम से कम एक सीट जीतने की स्थिति में है।
इस चुनाव में पांच सीटें खाली हो रही हैं, जिनमें पहले चार सीटें तृणमूल कांग्रेस और एक सीट वाम दल के पास थी। लेकिन वर्तमान राजनीतिक समीकरणों में बदलाव के कारण इस बार वाम दलों और कांग्रेस के लिए राज्यसभा में प्रतिनिधित्व बनाए रखना मुश्किल माना जा रहा है। विधानसभा में इन दलों की संख्या काफी कम होने के कारण उनके उम्मीदवारों की जीत की संभावना बेहद सीमित मानी जा रही है।
तृणमूल कांग्रेस की ओर से जिन नेताओं के नाम चर्चा में हैं, उनमें पार्टी के वरिष्ठ और अनुभवी नेता शामिल बताए जा रहे हैं। पार्टी संगठन से जुड़े कुछ प्रमुख नेताओं को राज्यसभा भेजे जाने की संभावना है। इससे पार्टी संसद में अपनी ताकत को और मजबूत करना चाहती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव पश्चिम बंगाल की राजनीति में नए समीकरणों को भी दर्शाएगा। भाजपा पहली बार विधानसभा की ताकत के आधार पर राज्यसभा में प्रतिनिधित्व हासिल करने की स्थिति में दिखाई दे रही है, जो राज्य की राजनीति में उसके बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है।
राज्यसभा चुनाव को लेकर सभी दलों ने अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है। तृणमूल कांग्रेस जहां अपनी सीटें सुरक्षित रखने पर ध्यान दे रही है, वहीं भाजपा एक सीट पर जीत सुनिश्चित करने की कोशिश में जुटी हुई है।
फिलहाल विधानसभा के मौजूदा आंकड़ों के आधार पर चुनाव परिणाम काफी हद तक तय माने जा रहे हैं। इसके बावजूद राजनीतिक दलों की गतिविधियां तेज हैं और अंतिम समय तक रणनीतिक बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
यह चुनाव न केवल राज्यसभा में प्रतिनिधित्व तय करेगा बल्कि पश्चिम बंगाल की राजनीतिक ताकत और दलों के प्रभाव का भी संकेत देगा। सभी की नजरें अब आगामी चुनाव प्रक्रिया और उम्मीदवारों की घोषणा पर टिकी हुई हैं।
राज्यसभा चुनाव पूरी तरह विधानसभा के गणित पर आधारित होता है और इसी कारण तृणमूल कांग्रेस को स्पष्ट बढ़त मिलती दिख रही है। विधानसभा में तृणमूल के पास भारी बहुमत है, जिससे वह आसानी से अपने चार उम्मीदवारों को राज्यसभा भेज सकती है। दूसरी ओर भाजपा के पास इतना संख्या बल मौजूद है कि वह कम से कम एक सीट जीतने की स्थिति में है।
इस चुनाव में पांच सीटें खाली हो रही हैं, जिनमें पहले चार सीटें तृणमूल कांग्रेस और एक सीट वाम दल के पास थी। लेकिन वर्तमान राजनीतिक समीकरणों में बदलाव के कारण इस बार वाम दलों और कांग्रेस के लिए राज्यसभा में प्रतिनिधित्व बनाए रखना मुश्किल माना जा रहा है। विधानसभा में इन दलों की संख्या काफी कम होने के कारण उनके उम्मीदवारों की जीत की संभावना बेहद सीमित मानी जा रही है।
तृणमूल कांग्रेस की ओर से जिन नेताओं के नाम चर्चा में हैं, उनमें पार्टी के वरिष्ठ और अनुभवी नेता शामिल बताए जा रहे हैं। पार्टी संगठन से जुड़े कुछ प्रमुख नेताओं को राज्यसभा भेजे जाने की संभावना है। इससे पार्टी संसद में अपनी ताकत को और मजबूत करना चाहती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव पश्चिम बंगाल की राजनीति में नए समीकरणों को भी दर्शाएगा। भाजपा पहली बार विधानसभा की ताकत के आधार पर राज्यसभा में प्रतिनिधित्व हासिल करने की स्थिति में दिखाई दे रही है, जो राज्य की राजनीति में उसके बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है।
राज्यसभा चुनाव को लेकर सभी दलों ने अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है। तृणमूल कांग्रेस जहां अपनी सीटें सुरक्षित रखने पर ध्यान दे रही है, वहीं भाजपा एक सीट पर जीत सुनिश्चित करने की कोशिश में जुटी हुई है।
फिलहाल विधानसभा के मौजूदा आंकड़ों के आधार पर चुनाव परिणाम काफी हद तक तय माने जा रहे हैं। इसके बावजूद राजनीतिक दलों की गतिविधियां तेज हैं और अंतिम समय तक रणनीतिक बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
यह चुनाव न केवल राज्यसभा में प्रतिनिधित्व तय करेगा बल्कि पश्चिम बंगाल की राजनीतिक ताकत और दलों के प्रभाव का भी संकेत देगा। सभी की नजरें अब आगामी चुनाव प्रक्रिया और उम्मीदवारों की घोषणा पर टिकी हुई हैं।
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